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लैरिंजियल कैंसर सर्जरी क्या है और किसको करानी चाहिए

लैरिंजियल कैंसर आपके गले के स्वरयंत्र में पाया जाता है। इस बीमारी के बारे में रोहतक स्थित वी केयर अस्पताल के हेड एंड नेक कैंसर के विशेषज्ञ डॉ भूषण कथूरिया यह बताते हैं कि एक व्यक्ति लैरिंजियल कैंसर से तब संक्रमित होता है जब उसके गले की स्वरयंत्र कोशिकाएं असामान्य रूप से तेजी से बढ़ने लगती है।

सर्जरी क्या है और किसको करानी चाहिए

इसके अंग्रेजी के अनुवाद की बात करें तो स्वरयंत्र को लैरिक्स कहते हैं और इसे सामान्य भाषा में वॉइस बॉक्स के नाम से भी जाना जाता है। जब कभी भी हम किसी से बात करते हैं तो हमारे गले में मौजूद यह वॉइस बॉक्स ध्वनि निकालने में मदद करती है। हमारे गले में वॉइस बॉक्स ऊपरी हिस्से में मौजूद है, इसी वॉइस बॉक्स में वोकल कॉर्ड मौजूद होती हैं, जब इस वोकल कॉर्ड के जरिए हवा गुजरती है तब इससे कंपन होकर हमारी आवाज बाहर की और निकलती है।

यही वह जगह है जहां लोगों को लैरिंजियल कैंसर होता है, जिसकी वजह से गले और आवाज से जुड़ी कई परेशानियां खड़ी होने लगती हैं। यह तो हमने आपको बताया कि लैरिंजियल कैंसर क्या होता है और यह इंसानों को किस वजह से होता है। आइए अब आपको बताते हैं कि इस भयंकर कैंसर की बीमारी से खुद को कैसे बचाया जा सकता है, और मेडिकल फील्ड में इस बीमारी से बचने के लिए कौन सी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.

लैरिंजियल कैंसर जैसी भयंकर बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए आज के समय लैरिंजियल फ्रेमवर्क सर्जरी का उपयोग किया जा रहा है। इस सर्जरी को आमतौर पर फ़ोनोसर्जरी और लैरिंजोप्लास्टी के नाम से भी मेडिकल फील्ड में जाना जाता है। यह एक तरह का सर्जिकल प्रोसीजर होता है जिसे आपके गले के वॉइस बॉक्स के हिस्से में किया जाता है, ताकि आपके गले से निकलने वाली आवाज और आपके गले में मौजूद वॉइस बॉक्स पहले की तरह नॉर्मल फंक्शन करने लगे।

आपके गले में होने वाली वॉइस डिसऑर्डर को ठीक करने के लिए इस सर्जरी का उपयोग किया जाता है, और इस तरह के डिसऑर्डर वोकल कॉर्ड पैरालिसिस, मसल वीकनेस और स्वरयंत्र में स्ट्रक्चरल एब्नार्मेलिटीज की वजह से पाई जाती है। इस सर्जरी के इस्तेमाल से वोकल कॉर्ड के स्ट्रक्चर को वापस से रिस्टोर किया जाता है ताकि आपके मोकल कार्ड में पहले की तरह से वाइब्रेशन होने लगे।

इन्सानों के गले में अलग-अलग प्रकार के वॉइस डिसऑर्डर देखे जाते है, यह डिसऑर्डर्स को किस प्रकार से हैं:

वोकल कॉर्ड पैरालिसिस- इस तरह का डिसऑर्डर इंसानों में तब पाया जाता है जब उनके गले में मौजूद एक या दो वोकल कॉर्ड कमजोर होने लगते हैं, उसकी वजह से उन्हें सांस लेने में और बोलने में तकलीफ होने लगती है.

वोकल कॉर्ड अट्रॉफी- इस तरह का डिसऑर्डर उन लोगों में देखा जाता है जो धीरे-धीरे बूढ़े होने लगते हैं जिसकी वजह से उनके गले में मौजूद वोकल कॉर्ड कमजोर और पतली होने लगती है.

वोकल कॉर्ड बोइंग- आपके गले में मौजूद वोकल कॉर्ड जब अपने ओरिजिनल शेख को खो देता है और धीरे-धीरे बाहर की और आना शुरू कर दे, तब इस तरह के डिसऑर्डर देखें जाते हैं

वोकल कॉर्ड डिस्फंक्शन- इस तरह का डिसऑर्डर आपके गले में मौजूद वोकल कॉर्ड में खिंचाव की वजह से पैदा होता है.

लैरिंजियल फ्रेमवर्क सर्जिकल टेक्निक्स:

लैरिंजियल कैंसर को जड़ से मिटाने के लिए लैरिंजियल फ्रेमवर्क सर्जिकल करी जाती है, और इसे करने के लिए अलग-अलग अप्रोच अपनाए जाते हैं, और इस तरह के अप्रोच पेशेंट की कंडीशन और सर्जन के एक्सपीरियंस के ऊपर डिपेंड होता है

थायरोप्लास्टी: यह एक प्रकार का बहुत ही कॉमन लैरिंजियल फ्रेमवर्क सर्जरी माना जाता है. इस सर्जरी में गले में एक चीरा लगाया जाता है और एक छोटा सा सिलिकॉन का हिस्सा आपके गले में मौजूद एडम एप्पल के कार्टिलेज में लगा दिया जाता है. यह एक प्रकार का इंप्लांटेशन होता है जो आपके वोकल कॉर्ड की कोशिकाओं को पहले से बेहतर बनाने में मदद करता है.

एरीटेनॉइड एडिक्शन: एरीटैनोइड कार्टिलेज के पैरालाइज होने पर इस प्रोसीजर का इस्तेमाल किया जाता है, इस सर्जरी में सर्जन की रिस्पांसिबिलिटी होती है कि वह खराब हो चुके एरीटैनोइड कार्टिलेज को वापस से उसकी पहली वाली पोजीशन पर लेकर आए.

एरीटेनोइडोपेक्सी: यह प्रक्रिया भी एरीटेनॉइड एडिक्शन की तरह ही होती है, जहां पर एरीटैनोइड कार्टिलेज को वापस से रिपोजिशन किया जाता है, लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि यह प्रक्रिया एडिक्शन की पथरिया के क्याकंपैरिजन में ज्यादा सिक्योर मानी जाती है.

कैसे होती है लैरिंजियल फ्रेमवर्क सर्जरी?

इस पूरे प्रोसीजर को कुल 4 हिस्सों में बांटा गया है जो कुछ इस प्रकार से हैं:

इंकिसिओं- इस प्रक्रिया में सबसे पहले वोकल कॉर्ड में एक चीरा लगाया जाता है.

एक्स्पोज़र- लैरिंक्स और वोकल कॉर्ड को एक स्पेशलाइज्ड इंस्ट्रूमेंट की मदद से देखा जाता है

इम्प्लांट प्लेसमेंट- थायरोप्लास्टी के समय थाइरोइड कार्टिलेज के हिस्से में इम्प्लांट किया जाता है, इसके अलावा बाकी के
प्रोसीजर में जरूरी एडजस्टमेंट को कार्टिलेज और टिशूज के इर्द गिर्द किया जाता है.

क्लोजर- अंत में जिस जगह पर चीरा लगाया जाता है उसे बंद कर दिया जाता है.

इस सर्जरी से रिकवरी होने में कितना समय लगता है:

इस सर्जरी से रिकवरी के लिए कोई निश्चित समय नहीं है, रिकवरी का प्रोसेस पूरी तरीके से आपके गले के आराम पर डिपेंड करता है और अलग-अलग वॉइस रिकवरी थेरेपी पर डिपेंड करता है। सर्जरी के बाद शुरुआती दिनों में थोड़ी दिक्कत है आएंगी जैसे कि गले में सूजन आना, लेकिन इस तरह के सिम्टम्स धीरे-धीरे कम होने लगेंगे और कुछ ही हफ्तों में पेशेंट वापस से पहले की तरह बोलने लगेंगे।

इस प्रकार की सर्जरी को करने से पहले एक्सपर्ट की राय बहुत जरूरी होती है, जिसे अक्सर एक्सपीरियंस्ड ओटोलरींगोलॉजिस्ट की मदद से ही किया जाता है। इस बीमारी के हर एक केस यूनिक होते हैं और यह सिर्फ पेशेंट की कंडीशन पर ही निर्भर करता है कि उसे ठीक करने के लिए किस प्रकार की सर्जरी को करना बेहतर हो

रोहतक में वी केयर हॉस्पिटल एक ऐसा संस्थान है जहां पर हेड एंड नेक कैंसर के लिए अति विशेषज्ञ डॉक्टर्स की टीम है। इस टीम का नेतृत्व डॉक्टर भूषण कथूरिया कर रहे हैं। डॉक्टर भूषण कथूरिया ने अमेरिका से हेड एंड नेक कैंसर के बारे में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस हॉस्पिटल की विशेषता है कि यहां पर हेड एंड नेक कैंसर के रोगियों को विश्वस्तरीय इलाज प्रदान किया जाता है और साथ ही कम खर्च में रोगियों का इलाज किया जाता है।

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